"ऐ बाबु टुँ कहाँ बिल्लाइल बाटो ?"

Sunday, 14 May 20170 तपाइको प्रतिकिया ब्यक्त गर्नुस

Posted By :- Admin {Hamar Sanesh}

कविटाके शिर्षक:
ऐ बाबु टुँ कहाँ बिल्लाइल बाटो ?
"
ऐ..! बाबु टुँ कहाँ बिल्लाइल बाटो ?
टोहाँर बख्रा,
उ हेरो,
औरेजे खपोट्के लैगिल्,
उ हेरो,
औरेजे झपोट्के लैगिल,
उहे चिल्हरियाहस्,
उहे बघुन्याँहस्,
उहे गिढ्वाहस्,
उहे उँर्वाहस्,
टुँ बस् कवाई भक्वाइल हेर्टी बाटो,
हाँठम् चुरिया घालके,
आँखिम् पट्टी कसके,
गोरम् जंजिर बहानके,

टुँहिन टोहाँर अढिकारसे बन्चिट करगिल बा,
टोहाँर उर्ना डैना छुरियासे काटगैल बा,
गोरम् डासट्वके पाइजु पेहरागैल बा,
टुहिन चुल्हा चौकिम् सीमिट करगिल बा,
हो, उहमारे,
ऐ..! बाबु अब उठो टुँ,
आपन अढिकारके लाग,
हाँठम् हँसिया मुंडार लैके,
मुहमे क्रान्टीके आवाज लैके,
ढक्ढिउरामे आत्मबल,और बिश्वास लैके,
टबकिल टुँ आपन अढिकार पैने बाटो,
टबकिल टुँ स्वतन्त्र हुइने बाटो,
उहमारे,
ऐ..! बाबु टुँ कहाँ बिल्लाइल बाटो,?
"
अंकर 'अन्जान सहयात्री'
पथरैया-4 जबलपुर,कैलाली

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